| Posted By:- विनय कुमार, बिजनौर (उप्र)
On 26/08/2010 |
किसी भी देश-समाज को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए सत्य पर आधारित, त्वरित न्याय करने वाली न्यायपालिका की आवश्यकता होती है। एक सर्वश्रेष्ठ न्यायपालिका ही सरकार-प्रशासन को जनकल्याणकारी, ईमानदार बनाए रख सकती है। लेकिन हमारी मौजूदा न्यायपालिका ऐसा करने में विफल रही है। अपराधियों-भ्रष्टïाचारियों को कानून का कोई खौफ नहीं है। वह इसकी कमियां जानते हैं, इसलिए बचकर निकल जाते हैं। अपराधियों को सजा देने व निर्दोषों को अन्याय से बचाने में न्यायपालिका पूरी तरह से विफल रही है। मुकदमों का देर से होने वाला निर्णय, आर्थिक शोषण, अदालतों में झूठ-भ्रष्टाचार के खेल के कारण भुक्तभोगी टूट जाता है। न्यायपालिका में सुधार के लिए सुझाव- 1. सर्वश्रेष्ठ व योग्यतम न्यायाधीश का चुनाव केवल वरीयता सूची से किया जाए जिसमें कोई साक्षात्कार न हो। 2. किसी के साथ अन्याय-अपराध होने पर वह सीधे न्यायाधीश से मिलकर अपनी शिकायत करे। पुलिस द्वारा पूछताछ न्यायाधीश के समक्ष हो और उसकी वीडियो रिकार्डिंग की जाए। 3. किसी भी न्यायालय में वकीलों की कोई आवश्यकता नहीं है। न्यायाधीश स्वयं ही अन्याय-अपराध को सुनकर अपने विवेक से न्याय करे। 4. अदालत में स्टे और जमानत की प्रक्रिया न हो, ये न्याय प्रक्रिया को बेहद लंबा बनाते हैं और जमानत पर छूटे व्यक्ति को नए अपराध करने व सबूतों-गवाहों को प्रभावित करने का मौका देते हैं। 5. अदालत में झूठ बोलने, झूठी गवाही देने, झूठे तथ्य रखने, पड्यंत्र करने वालों को कठोर कारावास की सजा दी जाए। 6. फरार अपराधी को अदालत सजा दे और पुलिस को उसे पकडऩे का आदेश दे। 7. हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट यह देखे कि हर फैसले में सर्वश्रेष्ठ न्याय हुआ है कि नहीं, अगर वे देखते हैं कि न्याय सही नहीं हुआ तो वह फैसला बदल दे और साथ ही यदि तथ्यों की अनदेखी की गई है तो निचली अदालत के न्यायाधीश के कार्रवाई हो।
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